Tuesday, July 23, 2024
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Navratri 2023: शक्ति की साधना करते समय आखिर क्यों रखा जाता है कलश, जानें इसकी स्थापना विधि और नियम

Navratri 2023: हिंदू धर्म में आश्विन मास के शुक्लपक्ष पड़ने वाली नवरात्रि का बहुत महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार शारदीय नवरात्रि के 09 दिनों में जो साधक पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी दुर्गा की पूजा करता है, भगवती उनके सभी कष्टों को पलक झपकते दूर करके मनचाहा वरदान प्रदान करती हैं. शक्ति की यह साधना की शुरुआत आश्विन मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से तब होती है, जब साधक कलश की स्थापना करने के बाद 09 दिनों तक विधि-विधान से माता की पूजा और व्रत करने का संकल्प लेता है. आइए देवी पूजा समेत अन्य मांगलिक कार्यक्रम में की जाने वाली कलश पूजा का महत्व और नियम जानते हैं.

कलश का धार्मिक महत्व

देवी पूजा और तमाम मांगलिक कार्यों में प्रयोग लाए जाने वाले कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है. कलश या फिर कहें कुंभ के बारे में पौराणिक मान्यता है कि देवी पूजा में प्रयोग लाया जाने वाला कलश समुद्र मंथन में निकले अमृत कलश के ही समान होता है, जिसमें पूरे ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा समाहित होती है. मान्यता है कि पूजा के कलश में 09 ग्रह, 27 नक्षत्र और 33 कोटि देवता और सभी तीर्थों का वास होता है. कलश की इसी पवित्रता और दिव्यता को देखते हुए हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य के दौरान कलश स्थापना का विधान है.

नवरात्रि में कब और कहां करें कलश स्थापना

पंचांग के अनुसार इस साल शारदीय नवरात्रि में देवी पूजा की शुरुआत में कलश की स्थापना 15 अक्टूबर 2023, रविवार को सुबह 07:30 से दोपहर 12:08 के बीच की जा सकेगी. यदि आप भी अपने घर में देवी पूजा के लिए कलश की स्थापना करना चाह रहे हैं तो किसी योग्य कर्मकांडी पंडित के निर्देशन में पूरे विधि-विधान से इसी शुभ मुहर्त का चयन करते हुए अपने घर के ईशान कोण में इसे स्थापित करें.

कलश स्थापना की सरल विधि

शक्ति की साधना के लिए नवरात्रि वाले दिन सबसे पहले तन और मन से पवित्र हो जाएं. इसके बाद जिस स्थान पर देवी की प्रतिदिन पूजा करनी हो वहां पर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर एक मिट्टी के कटोरे में कच्ची मिट्टी में जौ बो दें फिर उसके ऊपर एक तांबे या मिट्टी का कलश रखें. कलश को रखने से पहले उसमें एक सिक्का, लौंग और गंगाजल डाल दें और उसके चारों ओर मिट्टी चिपकाकर उसमें भी जौ बो दें. नवरात्रि की पूजा में कलश को हमेशा देवी दुर्गा की दायीं ओर ही रखें और प्रतिदिन पूजा करते हुए उचित मात्रा में पानी से सींचें और नौवें दिन विधि-विधान से पारण करने के बाद उसे किसी पवित्र स्थान पर दबा दें या फिर किसी नदी में प्रवाहित कर दें.

कलश पूजा से जुड़े जरूरी नियम

यदि आप अपने घर में देवी पूजा के लिए कलश की स्थापना कर रहे हैं तो पूजा के उस स्थान को पूरी तरह से पवित्र रखें और बगैर तन और मन से पवित्र हुए वहां पर न जाएं. कलश में बोए गये जौ को समय-समय पर पानी दें ताकि वह सूखने न पाए. देवी पूजा के लिए हमेशा मिट्टी, तांबे, सोने अथवा चांदी का कलश प्रयोग करें. कभी भूलकर भी नवरात्रि पूजा के लिए लोहे अथवा स्टील के कलश का प्रयोग न करें.

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