Home » Dharm » Who is god of rain: बारिश का देवता कौन हैं? जिनका भगवान कृष्ण ने तोड़ा था घमंड, महाभारत काल से है इनका गहरा संबंध

Who is god of rain: बारिश का देवता कौन हैं? जिनका भगवान कृष्ण ने तोड़ा था घमंड, महाभारत काल से है इनका गहरा संबंध

by Top Bihar
0 comment

Who is god of rain? (बारिश का देवता कौन हैं): हिंदू धर्म शास्त्रों में बारिश के देवता इंद्र देव माने जाते हैं। ऋग्वेद में इंद्र देव को शक्तिशाली देवता के रूप में दर्शाया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए कई कार्य किए। चाहे नदियों को दिशा देना हो या पर्वत से निकलती नदियों की धाराओं को नियंत्रित करना इसमें इंद्र देव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। माना जाता है कि देवराज इंद्र ने बादलों, नदियों और समुद्रों को व्यवस्थित किया और इस तरह से वह वैदिक युग के सबसे बड़े देवता बन गए। इंद्र को देवताओं का राजा भी माना जाता है।

इंद्र देवता का जन्म

पौराणिक कथाओं में ऋषि कश्यप को इंद्र के पिता और अदिति को उनकी माता के रूप में वर्णित किया गया है। इनका स्थान सभी देवताओं में सबसे ऊंचा माना गया है क्योंकि वह मानव का पोषण करने वाले देवता हैं। वैदिक युग में इंद्र देव को वर्षा का देवता, बादलों का कंट्रोलर, समुद्र का मित्र, पृथ्वी का स्वामी और वनों का आधार कहकर संबोधित किया गया है।

महाभारत में इंद्र देव का जिक्र

वेदों के अनुसार जब इंद्र नाराज हो जाते थे तो सृष्टि को भयंकर आंधी-तूफान और आपदा का सामना करना पड़ता था। महाभारत की एक कथा में भी इस बात का वर्णन किया गया है कि जब इंद्र नाराज हो गए थे तो उन्होंने बादलों को अधिक से अधिक वर्षा का आदेश दे दिया था। जिसकी वजह से बाढ़ जैसे हालात हो गए थे। इंद्र देव को पांडु पुत्र अर्जुन का पिता माना जाता है।

जब श्री कृष्ण ने तोड़ा इंद्र का घमंड

इतना ही नहीं एक बार ब्रज के लोगों को भी इंद्र देव की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। कहा जाता है कि ब्रज के लोग पहले अच्छी बारिश के लिए इंद्र देव की पूजा करते थे लेकिन श्री कृष्ण के कहने पर उन्होंने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी थी। जब इंद्र देव को इस बात का पता चला कि ब्रज के लोग अब उनकी पूजा नहीं कर रहे हैं तो क्रोध में उन्होंने बादलों को ये आदेश दे दिया कि वह तब तक वर्षा करते रहेंगे जब तक कि पूरा ब्रज, गोकुल और नंदगांव डूब न जाएं। तब भगवान कृष्ण ने ब्रज वासियों की रक्षा की थी और इंद्र के घमंड को तोड़ा था।

इंद्र देव कहां रहते हैं

ऐसा कहा जाता है कि इंद्र देव देव-लोक की राजधानी अमरावती में रहते हैं। उनके पास ऐरावत हाथी है जिसकी तीन सूंड़ हैं। इंद्र देव का ये शक्तिशाली हाथी उड़ भी सकता है। इतना ही नहीं एक उच्चैश्रवा नाम का पंखदार घोड़ा भी इंद्र देव की सवारी में शामिल है। अमरावती में ही नंदनवन और सुंदरवन नाम के खूबसूरत बागीचे हैं। इनमें से एक बगीचे में पारिजात वृक्ष लगे हैं तो दूसरे में कल्पवृक्ष लगा हुआ है। इंद्र देव विद्याओं में निपुण गंधर्वों के राजा भी माने गए हैं।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

You may also like