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पितरों को प्रसन्न करने के लिए कौवे को क्यों खिलाया जाता है भोजन? भगवान राम से जुड़ी है यह परंपरा

by Top Bihar
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पितृ पक्ष के दौरान पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए कौवे को भोजन कराने की परंपरा है. जिसका हिन्दू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौवे को भोजन कराने से पितृ गण संतुष्ट और प्रसन्न होते हैं. इस परंपरा के विषय में रामचरितमानस में भी एक कथा है, आइए जानते हैं रामचरितमानस की ये पौराणिक कथा.

पौराणिक कथा के अनुसार

श्रीरामचरितमानस की कथा के अनुसार, एक बार भगवान राम माता सीता के साथ बैठे हुए थे और उनके बालों को फूलों से सजा रहे थे. इंद्रदेव का पुत्र जयंत भी उस समय वहां उपस्थित होकर यह दृश्य देख रहा था. उसे संदेह हुआ कि क्या यह मनुष्य वास्तव में भगवान विष्णु का अवतार है. अपने संदेह को मिटाने के लिए उसने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने के इरादे से कौवे का रूप धारण किया और माता सीता के पैर में अपनी तीखी चोंच मार दी, जिससे माता सीता के पैर से खून बहने लगा.

क्रोधित हुए भगवान राम

इससे माता सीता के पैर में आई चोट को देखकर भगवान राम बहुत क्रोधित हो गए, जिस कारण उन्होंने कौवे को सबक सिखाने के लिए उस पर तीर से वार किया. भगवान श्रीराम को तीर छोड़ता देखकर जयंत अपनी जान बचाने के लिए पहले ब्रह्मलोक उसके बाद फिर शिवलोक की ओर भागा. लेकिन कोई भी देवता उसकी मदद करने में सक्षम नहीं हो पाया.

जयंत ने ली भगवान श्रीराम की शरण

सब जगह से निराश होकर जयंत अपने पिता इंद्र देव के पास गया और उनसे मदद करने के लिए कहा. इंद्रदेव ने कहा कि इस बाण से केवल स्वयं भगवान राम ही आपकी रक्षा कर सकते हैं, इसलिए आपको उनकी शरण में जाना चाहिए. इसके बाद जयंत दौड़कर प्रभु श्री राम के चरणों में गिर गया और उनसे क्षमा प्रार्थना करने लगा.

जयंत को मिला उसके कर्मों का फल

तब भगवान श्रीराम ने कहा कि यह बाण निष्फल तो नहीं किया जा सकता, परंतु इसके द्वारा होने वाली हानि को कम किया जा सकता है. तब उस तीर ने कौवे का वेश धारण किए हुए जयंत की एक आंख पर वार कर आंख फोड़ दी. उसी दिन से ही यह मान्यता है कि कौआ केवल एक आंख से ही देख सकता है.

कौवे को मिला वरदान

इस घटना के बाद ही भगवान श्रीराम ने कौवे को वरदान दिया था कि तुम्हें भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होंगे. माना जाता है कि बाद में पितृपक्ष में पितरों के साथ कौए के लिए भी भोजन निकालने की परंपरा तभी से शुरू हुई. इसलिए पितृ पक्ष के दौरान कौवे को भोजन करने का विशेष महत्व बताया गया है.

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