Sunday, July 21, 2024
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कौन हैं तेलंगाना में CM पद के सबसे बड़े दावेदार रेवंत रेड्डी? जो बने कांग्रेस की जीत के नायक

DESK: तेलंगाना में पहली बार कांग्रेस, सरकार बनाने के लिए तैयार है. तेलंगाना में कांग्रेस के लिए ये सफलता किसी जादू से कम नहीं है. तेलंगाना में कांग्रेस के लिए ये जादू करने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी हैं. रेवंत रेड्डी केसीआर के खिलाफ चुनाव में ताल ठोक रहे हैं.

इससे पहले कांग्रेस को तेलंगाना में साल 2014 में 19 और 2019 में 21 सीटें मिली थीं. कांग्रेस के लिए ये जीत बहुत मायने रखती है इसलिए नहीं कि उसने एक और राज्य में बीजेपी को हराया है या फिर उसे एक और राज्य में सत्ता मिलने जा रही है. कांग्रेस के लिए ये सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसने तेलंगाना में एक रिजनल पार्टी को हराकर सत्ता हासिल की है. जहां बीजेपी साउथ इंडिया से साफ हो चुकी है, वहीं कांग्रेस के लिए दक्षिण में एक और राज्य में सफलता हासिल करना कई मायनों में खास है.

कांग्रेस की इस जीत पर बहुत कुछ कहा जा रहा है, बहुत कुछ लिखा जा रहा है लेकिन जिस एक व्यक्ति की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो हैं रेवंत रेड्डी. रेवंत रेड्डी, तेलंगाना में कांग्रेस की इस धमाकेदार जीत के नायक बनकर उभरे हैं. उनकी बात इसलिए भी हो रही है क्योंकि उनका स्वभाव संघर्ष का है, उनकी छवि तेलंगाना में एक जननेता की है. यही कारण है कि जब वो टीडीपी के साथ थे तब भी वहां की जनता का उन्हें प्यार मिला और जब वो कांग्रेस के साथ हैं तब भी वो कमाल कर रहे हैं.

एबीवीपी से हुई राजनीति की शुरुआत

रेवंत रेड्डी के बारे में एक खास बात ये है कि उनकी राजनीति की शुरुआत एबीवीपी से ही हुई थी. रेवंत रेड्डी ने एबीवीपी से राजनीति की शुरुआत की थी. रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना राष्ट्र समिति के साथ भी काम किया है लेकिन पहली बार टीडीपी से विधायक बने. चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के साथ काम करने के बाद रेवंत रेड्डी कांग्रेस में शामिल हो गए. रेवंत फिलहाल कांग्रेस के सांसद हैं. इससे पहले दो बार टीडीपी से और एक बार कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं. रेवंत रेड्डी को साल 2021 में सोनिया गांधी ने प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया, ये रेवंत रेड्डी के लिए बहुत बड़ा दिन था. क्योंकि कई सीनियर नेताओं को दरकिनार कर रेवंत रेड्डी को ये अहम जिम्मेदारी मिली थी. महज 4 साल में रेवंत रेड्डी ने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने का काम किया है. तेलंगाना में कांग्रेस के लिए ये सच में जादू है!

अपनों ने ही पीछे खींचने की कोशिश की

रेवंत रेड्डी की कहानी इसलिए भी अहम है क्योंकि कांग्रेस के ही कई सीनियर नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी. तत्कालीन तेलंगाना के कांग्रेस इंचार्ज एम.पी हनुमंत राव ने तो खुलकर उनके खिलाफ मोर्चा खोला था, इसके लिए बकायदा उनके एबीवीपी और आरएसएस के बैकग्रांउड का हवाला दिया गया. लेकिन रेवंत रेड्डी आगे बढ़ते रहे. चाहे बीआरएस के खिलाफ खुलकर बोलने की बात हो, अपने खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस की बात हो या फिर अपनी जमीन तलाश रही बीजेपी के खिलाफ डटकर लड़ने की, रेवंत रेड्डी ने हर चुनौतियों को अवसर में बदलने का काम किया और कांग्रेस अलाकमान का भरोसा हालिस किया.

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रेवंत रेड्डी के लिए परिवार भी काफी अहम

राजनीतिक जीवन के इतर बात करें तो 8 नवंबर 1967 को तेलंगाना के महबूबनगर जिले के कोंडारेड्डी पल्ली में जन्मे रेवंत रेड्डी को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में भी जाना जाता है जो हमेशा अपने परिवार के बारे में सोचते हैं. रेवंत रेड्डी की शादी पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी की भतीजी गीता से हुई है. दोनों की निमिशा नाम की एक बेटी है. तेलंगाना में कांग्रेस एक ऐसे नेता की तलाश में थी जो वहां केसीआर के खिलाफ लड़ सके, बीजेपी को चुनौती दे सके और रेवंत ये सब बड़ी आसानी से कर रहे थे. यही नहीं रेवंत रेड्डी ने कई कांग्रेस नेताओं को भी अपने साथ जोड़ा और केसीआर के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष की नींव रखी.

जीत हार से बहुत आगे निकले रेड्डी

रेवंत रेड्डी दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं. कोडांगल और कामारेड्डी. कामारेड्डी में वो केसीआर को चुनौती दे रहे हैं. वो हारे या जीते कहानी ये नहीं है…और न ही इसकी चर्चा होगी.. 2017 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाले रेवंत रेड्डी जीत और हार से बहुत आगे निकल चुके हैं. रेवंत रेड्डी का उदय जनता के लिए छोटे-छोटे मुद्दों पर लड़ते हुए हुआ है. सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए हुआ है, चौराहों पर पुलिस की लाठी खाते हुए हुआ है.. रेवंत रेड्डी इसलिए भी खास हैं क्योंकि वो यहां तक लड़ते हुए पहुंचे हैं, संघर्ष करते हुए पहुंचे हैं. और सबसे बड़ी बात की जनता के साथ जमीन पर दिखत रहे हैं.

सार यही है कि तेलंगाना में कांग्रेस को एक नेता मिल गया है. एक ऐसा नेता जिसे जनता प्यार करती है, सुनती है ,एक ऐसा नेता जो विपक्ष में रहते हुए भी पार्टी को पांच साल तक जिंदा रखने का काम करता है.. और एक ऐसा नेता भी जिसे कांग्रेस तेलंगाना सौंप सकती है..

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