UPSC 2nd Topper: ‘न कोचिंग न लाखों का खर्च’, गरिमा ने खुद बताया कैसे बनी UPSC की सेकेंड टॉपर

बक्सर: विश्वामित्र की नगरी बक्सर आज बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही होगी. हो भी क्यों न, आज इस शहर की बेटी ने कुछ ऐसा ही किया है. आज जब यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से सिविल सेवा 2022 का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ तो पता चला कि इस छोटे से शहर की बेटी गरिमा लोहिया ने ऑल इंडिया दूसरी रैंक हासिल की है. बक्सर शहर झूम उठा. सिविल सेवा की परीक्षा में दबदबा रखने वाला बिहार एक बार फिर गदगद हो उठा.

जिस सिविल सेवा की परीक्षा के लिए लोग लाखों खर्च करते हैं. बड़े-बड़े शहरों में जाकर कोचिंग लेते हैं. उस परीक्षा को गरिमा लोहिया ने घर बैठे पढ़ाई कर के निकाल लिया. टीवी 9 भारतवर्ष से बात करते हुए गरिमा कहती है कि उसने ठान लिया था कि कुछ करना है. राह में कितनी भी बाधाएं आएं, बस कुछ कर दिखाना है.

क्या कभी हौसला डगमगाया?

गरिमा ने बताया कि उसने इस एग्जान को क्रैक करने के लिए किताबों का सहारा लिया. अगर कोई दिक्कत होती तो गूगल की मदद ले लेती. वह ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी कर रही थी. उसने कहीं से कोचिंग नहीं ली. उसका यह दूसरा प्रयास था. पहले प्रयास में वह असफल हो गई थी. हालांकि, उस दौरान भी उम्मीद थी कि वह एग्जाम निकाल लेगी. लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. थोड़ी निराशा भी हुई थी. तब मां-पापा ने हौसला दिया. गरिमा कहती है कि मां-पापा को उस पर ज्यादा यकिन था .

कैसा महसूस हो रहा है?

गरिमा खुश होते हुए कहती है कि आज खुद को बहुत लकी महसूस कर रही हूं. इतना खुश कभी नहीं हुई. खुश इस बात की भी, आज मैंने अपने मां-पापा के सपनों को पूरा कर दिया. पापा ने एक सपना देखा था कि उनकी बेटी एक बड़ी अधिकारी बने. आज भगवान ने सुन ली. आज पापा होते तो…गरिमा फिर आगे बोलते-बोलते चुप हो जाती है. दरअसल, गरिमा के पिता की साल 2015 में मौत हो गई थी.

गरिमा ने 10वीं की पढ़ाई बक्सर से ही की

गरिमा ने अपनी 10 वीं की पढ़ाई बक्सर से ही की है. लेकिन, असली बाधा आगे की उच्च शिक्षा हासिल करने की थी. क्योंकि बक्सर जैसे छोटे शहर में आज भी एक अच्छे स्कूल और कॉलेज का घोर अभाव है. इसलिए परिजनों ने गरिमा को इंटर की पढ़ाई के लिए वाराणसी भेजने का फैसला किया. तब गरिमा ने यहां के सनबीम स्कूल से 12 वीं की पढ़ाई की. 12 वीं की परीक्षा पास करने के बाद वह दिल्ली आ गई. उसने यहां के किरोड़ीमल महाविद्यालय में बीकॉम में दाखिला किया.

सफलता का श्रेय किसे?

गरिमा आज अपनी सफलता का श्रेय अपने मां-पापा को देती है. गरिमा कहती है कि उसकी मां ही उसकी ईश्वर हैं. उसकी प्रेरणास्रोत हैं. अक्सर देखा गया है कि जैसे ही बच्ची 10 वीं पास करती है, परिजन उसकी पढ़ाई छुड़ा कर शादी करने के चक्कर में लग जाते हैं. गरिमा कहती है कि मां-पापा ने कभी भी पढ़ाई करने से रोका नहीं. जो मांगा वह दिया. आज उसी का परिणाम है कि वह इतनी बड़ी परीक्षा में सफल हो पाई है.

बेटी पर गर्व: गरिमा की मां

गरिमा कहती है कि उसे देश के लिए कुछ बड़ा करना है. जरूरतमंदों की मदद करनी है. पर यह तभी संभव होता जब वह एक आईएएस अधिकारी बने. गरिमा की मां कहती हैं कि बेटी हमेशा यही सब बात करती. उसे देश की सेवा करनी है. कोरोना काल में ऐसा लगा कि उसकी पढ़ाई प्रभावित हो जाएगी तो वह बक्सर आ गई. फिर उसने यहीं से तैयारी की. आज अपनी बेटी पर गर्व महसूस होता है.

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