Tuesday, June 25, 2024
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Achala Ekadashi 2023: 15 या 16, कब है अचला एकादशी व्रत? ऐसे करेंगे पूजा तो भगवान विष्णु जगाएंगे आपकी सोई हुई किस्मत

Achala Ekadashi 2023: हर महीने में दो एकादशियां पड़ती हैं और उन सबको अलग-अलग नामों से जाना जाता है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि इसे अपरा एकादशी भी कहते हैं। अन्य एकादशियों की तरह इस एकादशी पर भी भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखने का विधान है। आइए जानते हैं अचला एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।

कब है अचला एकादशी व्रत?

पंचांग के अनुसार, इस साल अचला एकादशी 15 मई 2023 दिन सोमवार को रखा जाएगा। इसे अपरा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

अचला एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत – 15 मई 2023 को सुबह 2 बजकर 46 मिनट से
  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त – 16 मई 2023 को सुबह 1 बजकर 3 मिनट पर
  • ऐसे में 15 मई को उदया तिथि प्राप्त हो रही है, इसलिए इसी दिन अचला एकादशी व्रत रखा जाएगा।

अचला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान का मनन करते हुए सबसे पहले व्रत का संकल्प करें।
  • स्नान करने के बाद पूजा स्थल में जाकर भगवान की पूजा विधि-विधान से करें।
  • इसके लिए अपने परिवार सहित पूजा घर में या मंदिर में भगवान विष्णु व लक्ष्मी जी की मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें।
  • इसके बाद गंगाजल पीकर आत्म शुद्धि करें। रक्षा सूत्र बांधें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • शंख और घंटी का पूजन अवश्य करें, क्योंकि यह भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है।
  • इसके बाद विधिपूर्वक प्रभु का पूजन करें और दिन भर उपवास करें।

अचला एकादशी महत्व

कहते हैं जो व्यक्ति अचला या अपरा एकादशी का व्रत करता है, उसे जीवन में अपार खुशियां और वैभव की प्राप्ति होती है। साथ ही उसके धन-धान्य में भी वृद्धि होती है। ऐसा भी माना जाता है कि जो फल किसी व्यक्ति को कार्तिक मास में स्नान या गंगा जी के तट पर पितरों को पिंड दान करने से मिलता है, वैसा ही फल उसे अपरा एकादशी का व्रत करने से भी प्राप्त होता है।

साथ ही गोमती नदी में स्नान, कुंभ में श्री केदारनाथ जी के दर्शन, बद्रिकाश्रम में रहने और सूर्य-चन्द्र ग्रहण में कुरुक्षेत्र में स्नान करने का जो महत्व है, वही अपरा एकादशी के व्रत का भी महत्व है। लिहाजा इस दिन भगवान विष्णु की विधि-पूर्वक पूजा करनी चाहिए। साथ ही घर की साफ-सफाई और मन की स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

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